भारत ने सीरीज़ जीतने वाला कुल स्कोर कैसे बनाया और बचाया

पूजा पांडे

Sportsseier|30-07-2026

ज़िम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे T20I में भारत का प्रदर्शन एक सोची-समझी बल्लेबाज़ी के बाद अनुशासित गेंदबाज़ी पर टिका रहा, जिसने ज़िम्बाब्वे को लक्ष्य से काफी पीछे छोड़ दिया। 35 रन की इस जीत से भारत ने 3-0 से सीरीज़ पर कब्ज़ा किया और यह श्रेयस अय्यर के लिए भारत के T20I कप्तान के रूप में पहली सीरीज़ जीत रही।

सूर्यवंशी पर टिका बल्लेबाज़ी का खाका

इस मैच में भारत की बल्लेबाज़ी का तरीका महज़ पावरप्ले में तूफानी शुरुआत से कहीं अलग था। 15 वर्षीय सलामी बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी ने अपनी उम्र से कहीं अधिक परिपक्वता दिखाई। शुरू से ही हर गेंद पर जोरदार शॉट खेलने की बजाय उन्होंने परिस्थितियों को परखा — पिच दूसरे मैच में इस्तेमाल हो चुकी थी और गेंदबाज़ों को मदद दे रही थी — और अपने आक्रामक शॉट्स के लिए सही मौका चुना। उन्होंने सिकंदर रज़ा की पहली ही गेंद पर चौका जड़ा, फिर बीच के ओवरों में आक्रामकता पर लगाम रखी और 31 गेंदों में अर्धशतक पूरा करने के बाद पारी के अंत में रफ्तार बढ़ाई।

49 गेंदों पर 81 रन की उनकी पारी में 8 चौके और 4 छक्के शामिल थे। 15वें ओवर में मधेवेरे की गेंद पर लंबे ऑन के पास ब्रैड इवांस ने उन्हें कैच आउट किया, जब वे सीधे हवाई शॉट लगाने की कोशिश में थे। तब तक उन्होंने एक ऐसा आधार तैयार कर दिया था जिस पर शेष बल्लेबाज़ी टीम रन बना सके।

अभिषेक शर्मा की जल्दी विदाई — सीरीज़ में तीसरी बार मुज़ाराबानी की गेंद पर विकेटकीपर को कैच देकर दूसरे ओवर में 2 रन पर आउट — ने भारत पर पारी को संभलकर खेलने का दबाव डाला। ईशान किशन ने यह भूमिका निभाते हुए 26 गेंदों पर 29 रन बनाए और सूर्यवंशी के साथ साझेदारी में भारत को पावरप्ले से निकालकर बीच के ओवरों में पहुंचाया। 11वें ओवर की पहली गेंद पर रज़ा ने किशन को बोल्ड किया — यही वह क्षण था जब पारी थोड़ी लड़खड़ाई, और तब तक भारत का स्कोर 95/1 के मज़बूत आधार पर था।

श्रेयस अय्यर ने अपनी छोटी पारी में टाइमिंग और इरादे का प्रदर्शन किया; सूर्यवंशी के साथ 50 रन की साझेदारी के दौरान 15वें ओवर में मधेवेरे की गेंद पर लगातार दो चौके जड़े। अय्यर 18 गेंदों पर 27 रन बनाकर आउट हुए, जब मधेवेरे ने उनका कैच लपका। 18वें ओवर में अय्यर के आउट होने के बाद ज़िम्बाब्वे को थोड़ा नियंत्रण मिला, लेकिन रिंकू सिंह के आने से पलड़ा जल्द ही बदल गया। रिंकू ने 14 गेंदों पर 25 रन बनाए और एक छक्का तब लगाया जब मधेवेरे ने डीप एक्स्ट्रा कवर पर गेंद पकड़ी लेकिन उसे छोड़ने से पहले ही रस्सी से बाहर कदम रख दिया। आखिरकार 20वें ओवर के अंत में इवांस की गेंद पर मधेवेरे ने रिंकू को कैच आउट किया। छठे नंबर पर आए तिलक वर्मा ने 11 रन नाबाद बनाए और दबाव में संयम दिखाया। भारत ने 192/5 का स्कोर बनाया।

गेंदबाज़ी: यादव और ठाकुर ने तय किया माहौल

ज़िम्बाब्वे की पारी के पावरप्ले में भारत की गेंदबाज़ी योजना को गति और सटीकता के साथ अंजाम दिया गया। मयंक यादव ने पारी की पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट को आउट किया — 147 किमी/घंटा की यह गेंद सीम पर बाहर जाती देख बेनेट का किनारा पहली स्लिप पर सूर्यवंशी के हाथों में समाया। यह T20I पारियों में यादव का तीसरा पहली गेंद का विकेट था।

यश ठाकुर ने चौथे ओवर में लगातार दो गेंदों पर दो विकेट लिए। उन्होंने 125 किमी/घंटा की स्लो गेंद पर डायन मायर्स को छकाया, जिन्होंने गलत टाइमिंग से खेला और कप्तान अय्यर के हाथों मिड-ऑफ पर कैच दिया। फिर सिकंदर रज़ा को शानदार कॉट-एंड-बोल्ड पर गोल्डन डक पर पवेलियन भेजा। 143 किमी/घंटा की यह शॉर्ट गेंद लीडिंग एज लेकर गेंदबाज़ की बाईं ओर हवा में उछली। ठाकुर ने फुर्ती से आगे बढ़कर छलांग लगाई और पीठ के पीछे एक हाथ से कैच लपका। इन दोनों आउटों ने पहले चार ओवरों के भीतर ही ज़िम्बाब्वे की लक्ष्य का पीछा करने की वास्तविक उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

रवि बिश्नोई ने सातवें ओवर में बेन कर्रन को आउट किया, जिन्होंने रिवर्स स्वीप पर गलत शॉट खेला और यादव ने शॉर्ट थर्ड मैन पर कैच लिया। अशोक शर्मा ने 18वें ओवर में तदिवानाशे मरुमानी को गेट के बीच से बोल्ड किया, और मयंक यादव ने वापसी करते हुए मधेवेरे और ब्रैड इवांस को आउट कर 3/29 के आंकड़े के साथ सीरीज़ की अपनी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी की।

भारत की फील्डिंग चिंता का विषय रही, क्योंकि पांच कैच छोड़े गए, जिनमें से तीन यश ठाकुर की गेंदबाज़ी पर थे। इनमें अशोक शर्मा की गेंद पर ईशान किशन का आसान कैच और स्क्वेयर लेग पर ठाकुर की गेंद पर सब्स्टीट्यूट फील्डर हर्ष दुबे का नीचा कैच शामिल था। इन चूकों ने मैच का नतीजा नहीं बदला, लेकिन एक अन्यथा साफ-सुथरे प्रदर्शन पर दाग ज़रूर लगाया। भारत के तेज़ गेंदबाज़ 121-140 किमी/घंटा की रेंज में सबसे प्रभावी रहे, जहां 36 गेंदों पर 3/34 के आंकड़े के साथ 5.67 की इकॉनमी रेट दर्ज की।

पूरी पारी में दबाव में भारत की फील्डिंग उनके अपने मानकों से नीचे रही, फिर भी उनकी गेंदबाज़ी की विविधता — तेज़, स्पिन और चेंज-अप — ज़िम्बाब्वे की बल्लेबाज़ी टीम के लिए बहुत भारी साबित हुई, जिसके पास चौथे ओवर में तीसरा विकेट गिरने के बाद से मुकाबले में टिके रहने की ताकत ही नहीं बची।